विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
'28 दिन और सह लो, सूद समेत होगा हिसाब'
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के समर में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने एक बेहद आक्रामक बयान से सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया है। मुर्शिदाबाद के जालंगी में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अभिषेक ने विरोधियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि बस 28 दिन और सह लीजिए, चुनाव के नतीजे आने के बाद हम सब कुछ सूद समेत वापस करेंगे। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है और इसे चुनाव बाद की रणनीति के एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अपने संबोधन के दौरान अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मुर्शिदाबाद जिले में भाजपा तीन अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से चुनाव लड़ रही है। उन्होंने पहली एजेंसी के रूप में निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि मतदाताओं के नाम काटकर पक्षपात किया जा रहा है।
दूसरी एजेंसी के तौर पर उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी का नाम लिया, जबकि तीसरी श्रेणी में हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं को रखा। अभिषेक ने मतदाताओं को आगाह किया कि इन नेताओं या दलों को दिया गया एक भी वोट परोक्ष रूप से भाजपा के हाथ मजबूत करेगा। अभिषेक बनर्जी ने चुनावी मंच से विकास का कार्ड भी खेला। उन्होंने डोमकल और आसपास के क्षेत्रों में तृणमूल सरकार द्वारा किए गए कार्यों का ब्यौरा देते हुए कहा कि अस्पतालों का आधुनिकीकरण, सड़कों का जाल और शिक्षा के क्षेत्र में जो क्रांति पिछले कुछ वर्षों में आई है, वह वामपंथ के 34 साल के शासन में नदारद थी। उन्होंने विशेष रूप से महिला शिक्षा और स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
साथ ही, मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे पर जनता को ढांढस बंधाते हुए उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर अपील की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि किसी भी वैध नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार छीना न जा सके। जालंगी की इस सभा ने साफ कर दिया है कि तृणमूल इस बार रक्षात्मक होने के बजाय पूरी तरह से फ्रंटफुट पर खेल रही है।
अभिषेक के हिसाब चुकता करने वाले बयान ने जहाँ कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है, वहीं विपक्षी खेमे में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, मुर्शिदाबाद का यह सियासी मुकाबला अब और भी अधिक व्यक्तिगत और आक्रामक होता जा रहा है।